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अधिसूचना जारी: सीएम से लेकर विधायकों तक का इतने फीसदी वेतन छह महीने के लिए स्थगित

हिमाचल में CM, मंत्रियों और विधायकों के वेतन का हिस्सा 6 माह के लिए स्थगित
मुख्यमंत्री का 50%, मंत्रियों का 30% और विधायकों का 20% वेतन डेफर
सरकार बोली—कटौती नहीं, वित्तीय स्थिति सुधरने पर बाद में मिलेगा पैसा



आर्थिक दबाव के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और विधायकों के वेतन का एक हिस्सा अगले छह महीनों के लिए स्थगित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग (संसदीय कार्य) द्वारा शनिवार को जारी इस अधिसूचना में साफ किया गया है कि यह कदम राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित करने के लिए उठाया गया है और इसे एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत, उपमुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्यों और विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का 30 प्रतिशत, जबकि विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा अगले छह माह के लिए अस्थायी रूप से स्थगित रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह किसी प्रकार की कटौती नहीं है, बल्कि यह राशि बाद में राज्य की वित्तीय स्थिति के अनुसार निर्धारित समय पर जारी की जाएगी।

सरकार के इस फैसले को राज्य में चल रहे आर्थिक संकट से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने 21 मार्च को बजट पेश करते समय पहले ही यह संकेत दे दिए थे कि वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के वेतन का कुछ हिस्सा अस्थायी रूप से डेफर किया जाएगा। उसी घोषणा को अब अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया है।

हालांकि, इससे पहले सरकार ने प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों (ग्रुप-ए और ग्रुप-बी) के वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित करने का निर्णय भी लिया था, लेकिन 15 अप्रैल को इस फैसले को वापस ले लिया गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रिकांगपिओ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा करते हुए अधिकारियों को राहत दी थी।

सरकार का कहना है कि यह कदम अस्थायी है और इसका उद्देश्य वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति को संतुलित रखा जा सके। वहीं, इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं, क्योंकि इससे जनप्रतिनिधियों के वेतन पर सीधा असर पड़ेगा, भले ही यह अस्थायी ही क्यों न हो।